Fri. Apr 4th, 2025

चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के सभी बैंक खाते फ्रीज, बुधवार तक मिली मोहलत

Source - Indian National Congress Facebook Page

आगामी लोकसभा चुनाव 2024 से पहले कांग्रेस पार्टी और उसके यूथ विंग के बैंक खाते को फ्रीज कर दिया गया है, इसका खुलासा कांग्रेस के नेता अजय माकन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। कांग्रेस पार्टी का दावा है कि 2018 _2019 के मामले में आयकर विभाग ने यह कदम उठाया है, ट्रिब्यूनल में गुहार लगाने के बाद बुधवार तक कांग्रेस पार्टी को मोहलत दी गई है।

 

अजय माकन ने कहा कि यह तालाबंदी कांग्रेस पार्टी के अकाउंट्स  नहीं हुई बल्कि देश में लोकतंत्र पर तालाबंदी की गई है। आपको बता दें कि मार्च 2023 तक कांग्रेस पार्टी के खाते में 162 करोड़ रुपए थे, बीजेपी के खाते में 5425 करोड़ रुपए थे। बीजेपी की तुलना में कांग्रेस की के पास आखिर कुछ भी नही है।

क्या भाजपा चाहती है कि आगामी लोकसभा चुनाव विपक्ष विहीन हो? क्या भाजपा अकेले ही मैदान में उतरना चाहती है और खुद को विजयी घोषित करना चाहती है?

Source - Indian National Congress Facebook Page

इलेक्टोरल बांड का मामला अभी ठीक से लोगों को पता भी नहीं चला, लेकिन नई नई हेडलाइंस इन छापों के जरिए पैदा की जा रही है ताकि बीजेपी का इलेक्टोरल बॉन्ड के खेल को दबाया जा सके और विपक्ष बदनाम हो सके । यह कार्रवाई लोकतंत्र के खात्मे की तरफ इशारा करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी द्वारा 2017_2018 में लाई गई इलेक्टोरल बांड को असंवैधानिक बताया है और सभी चंदा देने वाले लोगों और कॉरपोरेट के नाम को सार्वजनिक करने को बोला है। अभी तक लगभग 11 हजार करोड़ रुपए पार्टियों को इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से मिल चुका है जिसमे अकेले बीजेपी को 6 हजार करोड़ से भी ज्यादा मिले हैं। कांग्रेस और टीएमसी को लगभग 1 हजार करोड़ रुपए मिले हैं।

कायदे से तो बीजेपी के खाते को सीज करना चाहिए था क्योंकि कोर्ट के अनुसार दानदाता कम्पनी का नाम गुप्त रखकर यह पॉलिसी सुनिश्चित करती है कि मदद के बदले मनी लॉन्ड्रिंग की जा सके। किसी काम के बदले राजनीतिक चंदा भी मनी लॉन्ड्रिंग हो सकता है।

सोचिए इलेक्टोरल बॉन्ड की चुनौती देने वाली याचिका दाखिल होने के बाद फैसला आने तक 4 CJI बदल गए, कई विधानसभा और एक लोकसभा चुनाव भी हो गए। अवैध तरीके से जुटाए गए धन से चुनाव लडे गए।

सरकार ने एक कानून बनाया और वह असंवैधानिक निकली,सोचिए हमें कैसे पता चलेगा कि पार्टी को कौन चंदा दे रहा है और बदले में उसे क्या क्या मिला?

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि आम जनता के पास जानने का अधिकार नही है कि वह राजनीतिक दलों के फंडिंग के बारे में जाने , सुप्रीम कोर्ट ने इस घटिया दलील को खारिज करते हुए सभी दानदाताओ के नाम सार्वजनिक करने का ऑर्डर दिया है।

सरकार और भाजपा इस मुद्दे पर बोलने से घबरा रही है, कोई बयान ही नही आ रहा है और इसे दबाने के लिए कांग्रेस के खाते बंद करने का खेल खेला जा रहा है।

 

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