Fri. Apr 4th, 2025

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की सच्चाई क्या है, आचार संहिता लगी हुई है फिर विज्ञापन कैसे छपा वो भी झूठे दावे के साथ?

भाजपा द्वारा चुनाव के समय में अखबार को दिया गया यह विज्ञापन सीधे सीधे आचार संहिता का उल्लंघन है।क्या चुनाव आयोग को भाजपा और इस अखबार पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए?

आचार संहिता लगी हुई है और यह विज्ञापन कैसे छपा?विज्ञापन में किया गया दावा सरासर झूठा है….

निर्वाचन आयोग को अपनी रीढ़ की हड्डी को सबके लिए मजबूत रखने की जरूरत है ताकि जो इज्जत और जो रूतबा टीएन शेषन ने बनाकर रखा था, उतना न सही उसका 10% भी बचा कर रखना चाहिए। वह इसलिए ताकि आयोग के अफसरानों के बच्चे और उनके बच्चों के बच्चे लोगों से यह कह सकें कि उनके पिता…दादा…कभी निर्वाचन आयोग में कार्यरत थे जो भारतीय लोकतंत्र को जिंदा रखता था/है…..खैर! मुद्दा यह है कि आज पीएम सूर्य योजना का यह विज्ञापन ऐसे समय अखबारों में कैसे छपा जब देश में आचार संहिता लगी हुई है और चुनाव चल रहे हैं.. ऐसी हिमाकत कैसे हुई? किसने की? क्यों की??…अगर टीएन शेषन होते तो यह हिम्मत कोई राजनीतिक दल और अखबार कर सकता था?फिलहाल यह योजना ही पूरी की पूरी धुप्पलबाजी है।कहीं कोई शून्य बिजली का बिल नहीं आ रहा है ठीक 15 लाख रूपए की तरह।

इस योजना के तहत सोलर कनेक्शन लेने वालों का मात्र 20% बिजली बिल कम आता है। असली खेल यह है कि पीएम सूर्य योजना में लगने वाले सोलर पैनल और दूसरे इक्यूपमेंट एक सर्वाधिक चहेते उद्योगपति की कंपनी बनाती और सप्लाई करती है। इसके अलावा इसी “चहेते” की ही 3 कंपनियां और हैं जो वास्तव में अडानी की शेल कंपनियां हैं जो इसमें कथित तौर पर लगी हुई हैं। यह पूरी योजना ही संदेह के घेरे में है और इसकी व्यापक जांच की जरूरत है। भाजपा सरकार ने एक करोड़ घरों में पीएम सूर्य योजना के तहत सोलर पैनल लगवाने का लक्ष्य रखा है। तीन किलो वॉट के कनेक्शन का खर्च एक लाख अस्सी हजार है जिसमें सरकार एक लाख आठ हजार की सब्सिडी देगी। अब आप 1.80 लाख को एक करोड़ घरों से मल्टीप्लाई करके खरबों के इस खेल को समझ सकते हैं।यही नहीं, उत्तर प्रदेश के 50% बेसिक परिषद के सरकारी स्कूलों में सरकार सोलर पैनल लगवाएगी इसका फायदा सीधे तौर पर “चहेते” और उसकी शेल कंपनियों को पहुंचेगा। देश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में स्थित SSB, ITBP इत्यादि सैन्य और अर्द्धसैन्य शिविरों में सोलर पैनल लग रहे हैं। बहुत से अन्य सरकारी विभागों में सोलर पैनल अनिवार्य रूप से लग रहे हैं। पैनल और इक्यूपमेंट्स नकद भुगतान पर सोलर पैनल लगाने वाली एजेंसियां “चहेते” से खरीद रही हैं।अब खेल समझ में आया कि ये सूर्य कहां और किसके घर में चमकना है!

जनता के कल्याण के लिए बनने वाली लगभग सभी योजनाओं का यही हाल है, योजनाओं को ऐसे प्रचारित किया जाता है जैसे कि बहुत ही जन कल्याणकारी है, पर जनता से ज्यादा कुछ चहेते पूंजीपति का लाभ उसमें निहित होता है । अखबार में सीधे सीधे यह बताया जा रहा है कि बिजली का बिल जीरो हो जायेगा जो कि सरासर झूठ है और इसे चुनाव के समय विज्ञापन के तौर पर प्रचारित करना आचार संहिता का उल्लंघन है।

मानवेंद्र प्रियदर्शी (MahaBodhi Times)

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