Fri. Apr 4th, 2025

पिछले 2 दिन पूर्व मैं काराकाट लोकसभा क्षेत्र के गोह विधानसभा में ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए गया हुआ था। उससे 2 दिन पूर्व वहां पर पवन सिंह का रोड शो हुआ था ,जी वही पवन सिंह जो भोजपुरी सिंगर हैं, अभिनेता हैं।

यहां पर एनडीए गठबंधन से प्रत्याशी हैं उपेन्द्र कुशवाहा जो कि नरेन्द्र मोदी सरकार में मंत्री रह चुके हैं। उपेन्द्र कुशवाहा 2014 में मोदी लहर में खुद की पार्टी से काराकाट से सासंद बने,2019 के लोकसभा चुनाव से पहले नरेन्द्र मोदी के मंत्रीमंडल से इस्तीफा देकर जद यू में शामिल हो गए लेकिन जद यू में भाव न मिलता देख फिर से नई पार्टी बना ली और फिर से 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन से उम्मीदवार हैं। अब इनकी छवि दलबदलू नेता की हो गई है। एनडीए के समर्थकों खासकर हिन्दू धर्म के तथाकथित उच्च जाति वर्ग के लोगों का कहना है कि उपेन्द्र कुशवाहा सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम व्यवस्था और आरक्षण की EWS की व्यवस्था के खिलाफ़ रह चुके हैं इसलिए भी वे सभी उनसे नाराज हैं। ज्यादातर लोग उनसे नाराज हैं क्योंकि सासंद रहने के दौरान वे लोगों से कभी मिलने नहीं आए, फोन करने पर बोल दिया जाता था कि अभी दिल्ली में हैं। यहां पर केन्द्रीय विद्यालय भी नहीं खुलवा सके हालांकि इनके समर्थकों का कहना है कि बिहार सरकार ने जमीन नहीं दी इसलिए केंद्रीय विद्यालय नहीं खुल पाया। अभी 20 दिन पहले ही एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमे कुछ नेता टाइप के लोग उनसे एक बैठक में कहते नजर आ रहे थे कि सर, आपका सम्मान करते हैं, स्वागत करते हैं लेकिन वोट तो आपको नहीं देंगे।

आपको बता दें कि पवन सिंह भी भाजपा के सदस्य हैं और उनको बंगाल के आसनसोल से भाजपा ने टिकट दिया था पर वो वहा से चुनाव लड़ने से मना कर दिए क्योंकि इनको बिहार से चुनाव लडना था। आसनसोल में पवन सिंह का विरोध शुरु होने वाला था क्योंकि ये बंगाल की महिलाओं पर भद्दी गाने गा चुके हैं।
अब बयान बाजी भी शुरु हो चुकी है। आरा से चुनाव लड़ने जा रहे भाजपा के आरके सिंह ने बोला है कि भाजपा पवन सिंह को पार्टी से निकालती क्यू नहीं?

पवन सिंह के सवाल पर दौरान उपेन्द्र कुशवाहा बोल चुके हैं कि “उन्हें हौआ न बनाया जाय,मेरे साथ मोदी जी का हाथ है इसलिए मेरी जीत तय है”।इस पर पलटवार करते हुए पवन सिंह कहते हैं कि “मोदी जी के भरोसे लोग कब तक जीतेंगे”।

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान ये समझ में आया कि पवन सिंह और उपेन्द्र कुशवाहा में पवन सिंह का पलड़ा भारी है लेकिन पवन सिंह के विरोधी बताते हैं कि पवन सिंह के समर्थक ज्यादातर कम उम्र के बच्चे हैं और लोग मनोरंजन के लिए भीड़ लगा रहे हैं।

जीत की तरफ अग्रसर दिख रहे इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी राजा राम सिंह वामपंथी नेता रहे हैं तथा किसानों की लड़ाई लड़ते आए हैं।राजाराम सिंह दो बार विधायक रहे। पहली बार 1995 में और दूसरी बार 2000 में। किसान की लंबी लड़ाई लड़ी है तथा देश भर में किसान आंदोलन में सक्रिय रहे हैं। लोकसभा का चुनाव भी लड़ते आए हैं पर बार बार हार का सामना करना पड़ा है। इस बार इनकी जीत की संभावना बन रही है क्योंकि ये कुशवाहा जाति से आते हैं, जमीनी नेता हैं, दूसरी तरफ NDA से उपेन्द्र कुशवाहा हैं जिनसे लोग नाखुश हैं। दो कुशवाहा नेताओं की लड़ाई में पवन सिंह यहां राजपूत वोट काटने में सफल रहेगें और भी जाति वर्ग के लोगों का कुछ वोट पवन सिंह को मिल सकता है। भाजपा के कई लोगों ने बताया कि वे लोग भाजपा को वोट देते आए हैं पर इसबार पवन सिंह को देंगे।

ऐसी परिस्थितियां बन चुकी है कि भाजपा नीत एनडीए गठबंधन का वोट पवन सिंह और उपेन्द्र कुशवाहा में बंट जाएगा और इंडिया एलायंस के राजाराम सिंह जीतने में सफल होंगे पर ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने भी यहां से अपना प्रत्याशी उतार दिया है जिनका नाम प्रियंका चौधरी है और ये अति पिछड़ी जाति से आती हैं, इनसे राजाराम सिंह को कुछ वोटो का नुकसान हो सकता है। एक और प्रत्याशी काराकाट से लड़ रहीं हैं जो कि भूमिहार जाति से आती हैं, दिल्ली में रहती थीं, नौकरी वाली दीदी के नाम से अपनी पहचान बना पाने में सफल हुई हैं।

काराकाट अब हॉट सीट बन चुकी है। मई के दूसरे सप्ताह में नामांकन होना है। देखना दिलचस्प होगा कि काराकाट की जनता भोजपुरी सिंगर पवन सिंह को दिल्ली भेजती है या उपेन्द्र कुशवाहा अपनी साख बचा पाते हैं या किसान नेता राजाराम सिंह इतिहास लिखेंगे??
मानवेंद्र प्रियदर्शी (MahaBodhi Times)

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