आज से 4 साल पहले 2020 में किसान आंदोलन के दौरान लगभग 700 किसान शहीद हो गए थे, आज फिर वही परिस्थितियां हैं। फर्क ये है कि पिछली बार वो दिल्ली के बॉर्डर पर रोक दिए गए थे और इस बार हरियाणा के बार्डर पर ही रोक दिए गए हैं। शंभू बार्डर पर किसानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहें हैं, रबर बुलेट इस्तेमाल किए जा रहें हैं, ड्रोन से बम बरसाए जा रहें हैं। पुलिस खोद मारने की ट्रेनिंग दे रही है। गांव गांव जाकर रात के अंधेरे में हरियाणा पुलिस धमकी दे रही है कि “कोई भी किसान ट्रैक्टर लेकर आंदोलन में शामिल होगा उसकी ट्रैक्टर जब्त कर ली जाएगी, आंदोलनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, उनके पासपोर्ट को निरस्त कर दिया जायेगा”।
2020 में जो आंदोलन की शुरुआत हुई थी उसका मूल कारण तीन नए कृषि कानूनों का थे। किसानों का कहना था कि कृषि कानून कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बढावा देता था, किसानों के लीगल राइट्स बहुत कम थे, कालाबाजारी को बढ़ावा देने वाले कानून थे। उस समय भी सड़को पर कील और बड़े बड़े ब्लॉक्स रखे गए थे सड़क पर, इस बार भी रखे गए हैं बल्कि सीमेंट से जाम कर दिए गए हैं। पिछली बार सरकार झुक गई थी और सरकार ने बोला था कि कृषि कानून वापस लिए जाते हैं और कहा गया कि किसानों की मांग के लिऐ कमिटी गठित कर दी जाएगी, आज भी मांगे वही है।
चूंकि इस बार नए संगठनों ने आन्दोलन का आगाज किया है तो उनकी कुछ और मांगे भी हैं जिसमे कर्जमाफी भी शामिल है।किसान कहते हैं कि पिछले 10 सालों में पूजीपतियों के लाखों करोड़ रुपए माफ कर दिए गए लेकिन किसानों को कुछ नही मिला। किसान कहते हैं कि क्या कभी किसी ने आंदोलन करते पूंजीपतियों को देखा है? किसानों को अब आन्दोलन करने से भी रोका जा रहा है।
किसानों की मुख्य मांगे:
१. MSP पर कानून बनाया जाए
२. कर्जमाफ़ी की जाए
३.WTO से बाहर निकलो
४. पूर्व में आंदोलन में शामिल किसानों पर से केस को वापस लिया जाए
५. लखीमपुर खीरी में थार चढ़ाकर मारे गए किसानों को मुआवजा दिया जाए
६. भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन
सरकार अपनी पीठ थपथपाने के लिऐ MS स्वामीनाथन को भारत रत्न तो दे देती है लेकिन स्वामीनाथन की सिफारिशों को लागू नहीं करती है।किसानो का कहना है कि सरकार इस देश के किसानों को खत्म करना चाहती है, सरकार चाहती है कि खेती पर भी कॉरपोरेट का कब्जा हो, देश में कोई किसान नही सिर्फ मजदूर ही रहें।
देशवासियों को किसानों के दर्द को समझना चाहिए, उन्हें फर्जी किसान, अमीर किसान कह देने से किसी का भला नहीं होने वाला। किसान को एमएसपी की गारंटी चाहिए जो कि देशहित में बहुत ही जरूरी है। मोदी जी चाहें तो देश के अमीर और गरीब किसानों के लिऐ एमएसपी पर कानून बनाकर, मामूली कर्जमाफी कर आंदोलन को समाप्त कर सकते हैं, कई जिंदगियां बचा सकते हैं।
देश के आंदोलनकारी किसानों को आंदोलनजीवी कहने वाले मोदी जी क्या किसानों को एमएसपी की गारंटी देंगे जिसकी वकालत वे प्रधानमंत्री बनने से पहले किया करते थे, वैसे भी आजकल तो मोदी जी की गारंटी वाले पोस्टर, डिजिटल बोर्ड मोदी की गारंटी से भरे पड़े हैं।
उनके लोग आज वही थेथरई पर उतर आए हैं कि मोदी जी ने कानून वापस नहीं लिऐ थे, जैसे 15 लाख और काला धन जुमला था वैसे ही सवाल करने पर सब जुमला ही कह दिया जायेगा।
राकेश टिकैत कह रहे हैं कि जवानों के नाम पर वोट मांगे जा रहे हैं और किसानों का खून चूसा जा रहा है। अपनी जमीनें बचानी है तो आन्दोलन करना पड़ेगा, ज़िंदा रहना है तो आन्दोलन करना पड़ेगा।
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